सबसे कम उम्र में प्रदेश अध्यक्ष, सामाजिक कार्यकर्ता,बनने वाले राजकुमार सतनामी को मिलेगा लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड अवार्ड
रायपुर/नई दिल्ली।
छत्तीसगढ़ के युवा सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार सतनामी ने कम उम्र में समाजसेवा और जनहित के क्षेत्र में जो मिसाल कायम की है, उसी का परिणाम है कि उनका नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। उन्हें यह सम्मान सबसे कम उम्र के प्रदेश अध्यक्ष और क्रांतिकारी सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में दिया जा रहा है। यह अवार्ड प्रमाण पत्र समारोह 24 जनवरी 2026 को रफी मार्ग, संशाद मार्ग के पीछे, आरबीआई बैंक के समीप, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें राजकुमार सतनामी स्वयं उपस्थित होकर यह ऐतिहासिक सम्मान ग्रहण करेंगे।
राजकुमार सतनामी ने मात्र 15 वर्ष की उम्र से ही सामाजिक योगदान की शुरुआत कर दी थी। वर्ष 2015 में स्कूल जाने वाली सड़क खराब होने पर उन्होंने ग्राम पंचायत पढ़इइन में आंदोलन कर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया। कक्षा आठवीं में पढ़ते समय ही उन्होंने बच्चों के अधिकारों के लिए अपने शिक्षकों से संघर्ष किया और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। कम उम्र में ही उन्होंने गांव के सरपंचों तक से सवाल करने का साहस दिखाया और समाज को न्याय दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाए।
उनकी सक्रियता और समर्पण को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश सतनामी समाज के संस्थापक द्वारा उन्हें मात्र 22 वर्ष की उम्र में जिला अध्यक्ष, मुंगेली की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद 23 वर्ष की उम्र में दीपक मिरी जी द्वारा उन्हें सतनामी समाज छत्तीसगढ़ युवा प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव (आईटी सेल) नियुक्त किया गया। उसी उम्र में अनुसूचित जाति महासंघ के संस्थापक हरजीत सतनामी जी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी, जिसे वे आज तक निष्ठा के साथ निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, रत्नावली कौशल सतनामी जी द्वारा मानव अधिकार एंटी करप्शन सेल फाउंडेशन भारत, छत्तीसगढ़ के मीडिया विभाग में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई।
राजकुमार सतनामी कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनका स्पष्ट उद्देश्य किसी को भड़काना नहीं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारा और जागरूकता फैलाना है। वे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और अच्छे कार्यों की जानकारी समाज तक पहुंचाने का कार्य भी निरंतर कर रहे हैं। उनके इन सभी कार्यों की गहन जांच पेपर और सोशल मीडिया के माध्यम से कर लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने यह सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया।
रिकॉर्ड की सूचना मिलने पर राजकुमार सतनामी ने भावुक होते हुए कहा,
“मैं खुद को इस लायक नहीं समझता, लेकिन आप लोगों ने मुझे इस योग्य माना, इसके लिए मैं आभारी हूं। यह सम्मान मैं सतनामी समाज के मार्गदर्शकों और सर्व समाज के उन सभी लोगों को समर्पित करता हूं, जिन्होंने मेरे हर कार्य को समझा और मुझे आगे बढ़ने का अवसर दिया।”
यह सम्मान न केवल राजकुमार सतनामी की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और सर्व समाज के लिए गर्व का विषय है।
संदेश:
- “कम उम्र कभी भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बनती, अगर इरादे मजबूत हों।”
- “जो समाज के लिए जीता है, इतिहास उसी का नाम लिखता है।”
- “संघर्ष से घबराना नहीं, क्योंकि संघर्ष ही सफलता की सबसे मजबूत नींव होता है।”






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