कागजी दावों की धज्जियाँ उड़ाता धान खरीदी केंद्र खैरा ,केंद्र में किसानों से खुलेआम लूट, जाँच में सही पाई गई शिकायत


लवन - धान खरीदी को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा पारदर्शिता और किसानों के हित की जो तस्वीर कागजों में दिखाई जा रही है, उसकी सच्चाई खैरा धान खरीदी केंद्र में बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यहाँ नियम, निर्देश और मानवीय संवेदनाएँ-तीनों को एक साथ रौंदा जा रहा है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, पसीने और हक पर सीधा हमला है।

*निर्धारित तौल से ज्यादा धान, खुलेआम लूट*

धान खरीदी के स्पष्ट नियम हैं-एक बोरी में 40 किलो 550 ग्राम से 600 ग्राम तक ही धान लिया जाना है। लेकिन खैरा केंद्र में यह नियम कागजों तक सीमित होकर रह गया है।

हकीकत यह है कि हर बोरी में एक से डेढ़ किलो अतिरिक्त धान जबरन लिया जा रहा है। यह कोई तकनीकी भूल नहीं, बल्कि सुनियोजित और लगातार चल रहा खेल है।

किसानों का कहना है कि यह अतिरिक्त धान उनकी मेहनत की सीधी चोरी है। दिन-रात खेतों में खून-पसीना बहाकर उपजाया गया धान तौल के नाम पर काट लिया जाता है। विरोध करने पर किसानों को चुप कराने की कोशिश होती है। कभी डांट-डपट, कभी धमकी, तो कभी आज तौल नहीं होगा कहकर मानसिक दबाव। यह स्थिति किसानों को बेबस और लाचार बना रही है।

*शिकायत पर पहुँचे अधिकारी, आरोप निकले सही*

किसानों की शिकायत को हल्के में लेना इस बार समिति प्रबंधन को भारी पड़ गया। शिकायत पर पहुँचे जाँच अधिकारी ने जब मौके पर तौली गई पुरानी बोरियों को दोबारा तौलवाया, तो सच खुद सामने आ गया।

किसानों, समिति प्रबंधक और मीडिया की मौजूदगी में हर बोरी में निर्धारित मात्रा से काफी अधिक धान पाया गया। यह स्पष्ट प्रमाण है कि किसानों की शिकायतें बेबुनियाद नहीं, बल्कि पूरी तरह सही थीं।

अधिकारी ने बयान लेकर पंचनामा तो बना लिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अब तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या यह जाँच भी बाकी फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी, या किसानों को वाकई न्याय मिलेगा?

*धान की सिलाई में घोर लापरवाही*

धान तौल के बाद तुरंत बोरी सिलाई अनिवार्य है, ताकि धान की सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन खैरा केंद्र में नियमों की खुली धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। पिछले कई दिनों से तौली गई बोरियाँ खुली पड़ी हैं, बिना सिली हुई। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर जोखिम है।धान की हेराफेरी, नुकसान और जिम्मेदारी से बचने का रास्ता। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठना लाजमी है कि यदि धान कम-ज्यादा हुआ, तो जिम्मेदार कौन होगा? या फिर यह लापरवाही जानबूझकर की जा रही है, ताकि बाद में सारा दोष किसानों के सिर मढ़ा जा सके?

*जानबूझकर विलंब, किसान बेहाल*

किसान सुबह-सुबह अपने धान लेकर केंद्र पहुँचते हैं। बोरी मिल जाती है, लेकिन तौल शुरू होने का नाम नहीं लेती। आरोप है कि समिति स्टाफ और हमाल जानबूझकर तौल में देरी करते हैं। घंटों इंतजार के बाद किसान थक-हार जाते हैं। बुजुर्ग, महिलाएँ और छोटे किसान भूख-प्यास, ठंड और धूप में बैठे रहते हैं।

इस देरी का एक और खतरनाक पहलू है। थके और मजबूर किसान अक्सर ज्यादा धान तौलने के विरोध से पीछे हट जाते हैं। यह देरी किसानों की मजबूरी को हथियार बनाकर लूट को आसान बनाने की रणनीति प्रतीत होती है।

*संरक्षण’ के बिना संभव नहीं-सुपरवाइजर और ब्रांच मैनेजर पर सवाल*

धान खरीदी केंद्रों का नियमित निरीक्षण सुपरवाइजर और ब्रांच मैनेजर की जिम्मेदारी है। निरीक्षण के नाम पर उन्हें प्रति क्विंटल भुगतान भी मिलता है। फिर सवाल उठता है कि खैरा केंद्र की इतनी गंभीर अनियमितताएँ उन्हें क्यों नहीं दिखीं? क्या निरीक्षण सिर्फ फाइलों और रिपोर्ट तक सीमित है?

केंद्र के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि ऊपर से दबाव रहता है- ज्यादा धान लो, सुखत भरना है। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह साफ संकेत है कि यह खेल संरक्षण और मिलीभगत के बिना संभव नहीं। ऐसे में निष्पक्ष जाँच केवल नीचे के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऊपर तक जवाबदेही तय होनी चाहिए।

*भौतिक सत्यापन ही निकालेगा सच*

हर तौल में एक से डेढ़ किलो अतिरिक्त धान लेना, महीनों में हजारों क्विंटल की लूट में बदल सकता है। यह किसानों की जेब पर सीधा डाका है। इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए केंद्र का पूर्ण भौतिक सत्यापन जरूरी है। तौल मशीन, रजिस्टर, स्टॉक, सिलाई की स्थिति और पिछले दिनों की सभी बोरियों की गहन जाँच होनी चाहिए। जब तक निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक किसानों का विश्वास बहाल नहीं होगा। धान खरीदी जैसे संवेदनशील विषय में ऐसी लापरवाही अक्षम्य अपराध है,और इसका खामियाजा किसानों को नहीं, दोषियों को भुगतना चाहिए।

*हो सकता है कि निर्धारित तौल से ज्यादा तौल हो रहा हो।मुझे इस शिकायत की मुझे कोई जानकारी नहीं है।*

प्रेम लाल साहू

प्राधिकृत अधिकारी

प्राथमिक क़ृषि साख सहकारी समिति खैरा।

*धान खरीदी मे लापरवाही बरतने वाले को बिल्कुल भी बक्शा नहीं जायेगा निश्चित तौर पर दोषियों पर कार्यवाही होंगी।*

दीपक सोनी 

कलेक्टर जिला बलौदाबाजार भाटापारा।