रायपुर। शहर के महात्मा गांधी वार्ड क्रमांक–08 अंतर्गत छोकरा नाला एक बार फिर विवादों में है। नाले की दोनों पटरियों पर 20–20 फीट तक मिट्टी पाटकर अवैध कब्जे का आरोप चितवन बिल्डर और रामा बिल्डर पर लगा है। यह मामला रायपुर नगर निगम क्षेत्र का है, जहां कब्जे के कारण न केवल निस्तारीकरण बाधित हो रहा है बल्कि बारिश के दिनों में जलभराव और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि नाले की चौड़ाई कम कर दी गई है, जिससे बरसात का पानी रिहायशी इलाकों की ओर मुड़ सकता है। इससे घरों में पानी घुसने, सड़कों के डूबने और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। आरोप है कि नाले के पास शासकीय भूमि पर भी पाटकर निर्माण की कोशिशें की गई हैं।

तहसीलदार को सौंपा गया लिखित आवेदन

मामले में सावित्री भारत धीवर, पार्षद महात्मा गांधी वार्ड–08 द्वारा तहसीलदार रायपुर को लिखित शिकायत दी गई है। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि खसरा क्रमांक 424 की सीमांकन रिपोर्ट के बावजूद नाले की जमीन पर मिट्टी भरकर करीब 70 फीट लंबाई और 20 फीट चौड़ाई में कब्जा किया गया। शिकायत में त्वरित कार्रवाई कर नाले और शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की गई है।

जो़न कमिश्नर तक पहुंची शिकायत

जनप्रतिनिधियों के अनुसार, नाले के अतिक्रमण को लेकर जो़न कमिश्नर से भी शिकायत की गई है। अब तक ठोस कार्रवाई न होने पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं? स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली बिल्डरों के आगे प्रशासन सुस्त दिख रहा है।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, शिकायत के आधार पर सीमांकन और जांच के निर्देश दिए गए हैं। तहसील कार्यालय में दस्तावेज़ों की पड़ताल के बाद नाले की वास्तविक चौड़ाई और शासकीय भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की बात कही गई है।

पर्यावरण पर गंभीर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि नालों पर कब्जा सीधे जल-निकासी तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। इससे भू-जल रिचार्ज, प्राकृतिक बहाव और शहरी पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली बरसात में शहर के इस हिस्से को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

चितवन बिल्डर का बयान

चितवन बिल्डर ने छोकरा नाला पर अवैध कब्जे के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
उन्होंने कहा— “हमारे पास कोई भी अवैध निर्माण या अतिक्रमण नहीं है। नाले की जमीन पर कब्जे का आरोप गलत है। हमने विधिवत अनुमति के तहत ही कार्य किया है। सीमांकन रिपोर्ट हमारे पास मौजूद है और यदि प्रशासन जांच करता है तो सच्चाई सामने आ जाएगी। सरकारी जमीन को नुकसान पहुंचाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

चितवन बिल्डर ने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक दबाव और बदनाम करने की कोशिश का परिणाम है।

रामा बिल्डर का बयान

वहीं रामा बिल्डर ने भी सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
रामा बिल्डर का कहना है— “छोकरा नाला पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा हमारे द्वारा नहीं किया गया है। हम नियमों और कानून के दायरे में रहकर ही निर्माण कार्य करते हैं। शिकायत मिलने पर हमने संबंधित दस्तावेज तहसील कार्यालय में प्रस्तुत कर दिए हैं। जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कहीं भी प्रशासनिक निर्देश मिलते हैं तो उसका पूरा पालन किया जाएगा।

अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है, या फिर छोकरा नाला अवैध कब्जों की भेंट चढ़ता रहेगा।