अदानी बनाम किसान: खेतों में उतरी JCB, दो माह से धरने पर बैठे अन्नदाता
ग्राम पंचायत की सहमति भी दरकिनार
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम पंचायत और ग्रामसभा की अनुमति लिए बिना ही भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। न तो ग्रामीणों से राय ली गई और न ही किसी तरह की औपचारिक सहमति। किसानों का कहना है कि यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गांव के अधिकारों पर सीधा हमला है।
खेतों में पुलिस और JCB, हालात हुए बेकाबू
मंगलवार को स्थिति उस वक्त विस्फोटक हो गई, जब प्रशासनिक अधिकारी, अदानी कंपनी के प्रतिनिधि और भारी पुलिस बल गांव पहुंचे और JCB से खेतों की मेड़ तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी। अपने खेतों को उजड़ता देख किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। मौके पर किसानों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, हालात कुछ देर के लिए बेकाबू हो गए। हालांकि बाद में प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित किया।
किसानों का अल्टीमेटम
धरने पर बैठे किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि “जब तक हमें नई गाइडलाइन के मुताबिक पूरा और न्यायसंगत मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक न धरना खत्म होगा और न ही कंपनी को जमीन पर काम करने दिया जाएगा।”
रायगढ़ के गेजामुड़ा में अब यह लड़ाई सिर्फ मुआवजे की नहीं रह गई है, बल्कि किसानों के अधिकार बनाम कॉरपोरेट ताकत की जंग बनती जा रही है। सवाल यह है कि प्रशासन किसके साथ खड़ा होगा—अन्नदाता के या अरबों की कंपनी के?




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