रायपुर – छत्तीसगढ़ का वन विभाग आज संरक्षण और संवर्धन का नहीं, बल्कि संरक्षण के नाम पर भ्रष्टाचार का पर्याय बनता जा रहा है। सत्ता बदली, सरकारें बदलीं, लेकिन वन विभाग में मलाई खाने वालों के चेहरे वही रहे—और उनका रसूख पहले से ज्यादा मजबूत होता गया।
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व वन मंत्री मोहम्मद अकबर का करीबी रहा एक चर्चित अधिकारी आज भी सत्ता के गलियारों में अछूत बना बैठा है। हैरानी की बात यह है कि भाजपा सरकार में भी उसे पूरा संरक्षण मिल रहा है, और यह संरक्षण सीधे तौर पर मौजूदा वन मंत्री केदार कश्यप से जुड़ा बताया जा रहा है।
कुर्सी से चिपका ‘दुलारा’, करोड़ों का खेल!
आरोप है कि कई गंभीर भ्रष्टाचार की आदतों के बावजूद यह अधिकारी वर्षों से कुर्सी पर जमा है। सूत्र बताते हैं कि अपने रिश्तेदारों के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट किए जा चुके हैं, लेकिन न जांच, न कार्रवाई—सिर्फ सत्ता का कवच।
कैम्पा फंड बना लूट का जरिया
केंद्र सरकार से जंगलों के लिए आने वाला कैम्पा (CAMPA) फंड भी कथित तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा। जंगलों के संरक्षण के नाम पर आई करोड़ों की राशि को अन्य मदों में खर्च कर दिया गया। शिकायतें हुईं, जांच की बातें उठीं—लेकिन नतीजा सिफर।
‘घोटाले की सीढ़ी’ चढ़ता आईएफएस!
वन विभाग में यह चर्चा आम है कि “यहां जितना बड़ा घोटाला, उतनी बड़ी तरक्की।” इसी का सबसे बड़ा उदाहरण बताया जा रहा हैPCCF श्रीनिवासन राव।
आरोप है कि कांग्रेस शासन में सरकारी एजेंट की भूमिका निभाते हुए इन्हें कैम्पा का प्रमुख बनाया गया, जहां जंगलों को बचाने के बजाय जंगल और फंड—दोनों को खोखला कर दिया गया।
शिकायतों में करोड़ों के घोटाले सामने आए, लेकिन कार्रवाई के बजाय इनाम मिला—सात वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों को पछाड़कर इन्हें वन प्रमुख जैसे शीर्ष पद से नवाज दिया गया।
कैम्पा की लूट से खड़ा किया ‘साम्राज्य’
कहते हैं लूट का पैसा घर नहीं बनाता, लेकिन अगर सरकार का संरक्षण मिल जाए तो घर नहीं, पूरा साम्राज्य खड़ा हो जाता है। आरोपों के मुताबिक, श्रीनिवास राव ने कैम्पा फंड और वन प्रमुख रहते हुए:
हैदराबाद में लगभग 25 करोड़ का आलीशान बंगला,
कई शॉपिंग मॉल,
लक्जरी गाड़ियों का काफिला,
और सैकड़ों करोड़ की बेनामी संपत्ति खड़ी कर ली।
आरोपों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि अगर निष्पक्ष जांच हो जाए तो राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा इसी अधिकारी के खाते में जाता दिख सकता है।
ननकी राम कंवर की शिकायत से हिल सकता है सिंहासन
अब इस कथित साम्राज्य पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह, जेल व सहकारिता मंत्री ननकी राम कंवर ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर IFS श्रीनिवास राव के खिलाफ जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ननकी राम कंवर ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस शासन में कैम्पा फंड का जमकर दुरुपयोग हुआ, वनरक्षक भर्ती में बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया गया, पैसे लेकर चहेतों को नौकरी दिलाने का खेल चला।
शिकायत के प्रमुख बिंदु
शिकायत में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे गए हैं— भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी: 4.25 लाख अभ्यर्थियों वाली परीक्षा में कई जिलों में भारी गड़बड़ियां। रात में गुप्त परीक्षाएं: सरकारी आदेशों को दरकिनार कर अंधेरे में फिजिकल टेस्ट।
मैनुअल नापजोख से चयन: रायगढ़, बीजापुर, दंतेवाड़ा जैसे जिलों में मशीनों के बजाय मनमानी। 10 करोड़ के संदिग्ध भुगतान: खर्च हुआ पैसा, लेकिन प्रक्रिया सवालों के घेरे में। टेंडर नियमों की खुलेआम धज्जियां: एजेंसी ने तय मानकों का पालन ही नहीं किया।
बड़ा सवाल
अब सवाल यह नहीं कि घोटाले हुए या नहीं—सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं? क्या सत्ता का संरक्षण कानून से बड़ा हो गया है? और क्या वन विभाग सच में जंगल बचा रहा है या कुछ चुनिंदा लोगों का भ्रष्टाचार साम्राज्य?






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