रायपुर/नई दिल्ली/दुबई। महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1700 करोड़ रुपये की भारतीय और विदेशी संपत्तियों को अटैच किया है। ईडी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 24 मार्च 2026 को अनंतिम कुर्की आदेश (PAO) जारी किया।
जारी आदेश के तहत दुबई (यूएई) में स्थित 18 अचल संपत्तियों और नई दिल्ली में स्थित 2 अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है। इन संपत्तियों का कुल बाजार मूल्य लगभग 1700 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

दुबई के पॉश इलाकों में हैं लग्जरी संपत्तियां
कुर्क की गई विदेशी संपत्तियां दुबई के प्रमुख और हाई-प्रोफाइल इलाकों में स्थित हैं। इनमें दुबई हिल्स एस्टेट के लग्जरी विला और अपार्टमेंट, बिजनेस बे और SLS होटल एंड रेजिडेंसेस के हाई-एंड फ्लैट्स, साथ ही प्रतिष्ठित बुर्ज खलीफा में स्थित अपार्टमेंट शामिल हैं।
सौरभ चंद्राकर समेत कई सहयोगियों के नाम पर संपत्तियां
ईडी के मुताबिक ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और उनके सहयोगियों—विकास छपारिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोरा, नितिन तिबरेवाल और सुरेंद्र बागड़ी—के नाम या उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के जरिए खरीदी गई थीं।
अवैध सट्टेबाजी से जुटाई गई करोड़ों की कमाई
जांच में खुलासा हुआ है कि ये संपत्तियां अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी संचालन से अर्जित अपराध की आय से खरीदी गई थीं। महादेव ऑनलाइन बुक एक अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट के रूप में काम करता था, जो टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड 365 और लेजर 247 जैसे कई प्लेटफॉर्म्स के जरिए सट्टा संचालन करता था।
यह नेटवर्क देशभर में “पैनल” या फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए संचालित होता था, जबकि इसके मुख्य संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से पूरे सिंडिकेट को नियंत्रित करते थे।
मुनाफे का बड़ा हिस्सा प्रमोटरों को: ईडी की जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से होने वाले कुल मुनाफे का करीब 70-75 प्रतिशत हिस्सा सीधे प्रमोटरों के पास जाता था, जबकि बाकी रकम पैनल संचालकों में बांटी जाती थी।
हवाला, क्रिप्टो और फर्जी खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग
अवैध कमाई को छिपाने के लिए हजारों फर्जी बैंक खातों और भोले-भाले लोगों के केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद रकम को हवाला नेटवर्क, क्रिप्टोकरेंसी और जटिल वित्तीय लेनदेन के जरिए विदेश भेजा गया और बाद में इसे भारत और यूएई में महंगी संपत्तियों में निवेश किया गया।
देशभर में 175 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी
इस मामले में अब तक ईडी देशभर में 175 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। साथ ही 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में दायर पांच अभियोगों में कुल 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की कार्रवाई
ईडी ने सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, अनिल अग्रवाल उर्फ अतुल अग्रवाल और शुभम सोनी के खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत आवेदन भी दायर किया है। इनमें उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर उनकी संपत्तियों की जब्ती की मांग की गई है।
अब तक 4336 करोड़ की संपत्ति अटैच
ईडी के अनुसार इस पूरे मामले में अब तक कुल 4336 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अटैच/जब्ती किया जा चुका है।
जांच जारी, और सख्ती के संकेत: ईडी ने स्पष्ट किया है कि अवैध सट्टेबाजी के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विदेशों में छिपे आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और उन्हें जल्द कानून के दायरे में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।




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