निसदा की 7 फर्शी खदानों पर बड़ी कार्रवाई : कलेक्टर ने निरस्त किए पट्टे, 30.40 करोड़ का प्रकरण तैयार — अवैध खनन से 200 मीटर तक पटी नदी, मचा हड़कंप
रायपुर। आरंग क्षेत्र के ग्राम निसदा में लंबे समय से चल रहे फर्शी पत्थर खदानों के खेल पर आखिरकार प्रशासन की सख्त कार्रवाई हो गई है। नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध उत्खनन और पर्यावरणीय उल्लंघन के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए निसदा की सभी 7 फर्शी पत्थर खदानों के पट्टे निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है। कलेक्टर के इस फैसले के बाद खनन कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से इन खदानों में बड़े पैमाने पर अनियमित खनन की शिकायतें सामने आ रही थीं। आरोप था कि खदान संचालक निर्धारित सीमा से अधिक उत्खनन कर रहे थे और खदानों से निकलने वाले भारी मात्रा में वेस्ट पत्थर और मलबे को बिना किसी अनुमति के सीधे नदी किनारे डंप किया जा रहा था। इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था। खदानों से निकला वेस्ट मटेरियल इतने बड़े पैमाने पर नदी किनारे फेंका गया कि करीब 200 मीटर तक नदी का किनारा मलबे से पट गया।
इससे न केवल नदी का बहाव प्रभावित हुआ बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने का खतरा भी पैदा हो गया था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो आने वाले समय में नदी का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता था।
ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत भी की थी। लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण नाराजगी बढ़ती जा रही थी। इसी बीच जब इस पूरे मामले को लेकर खबर सामने आई तो जिला प्रशासन हरकत में आया और खनिज विभाग को तत्काल जांच के निर्देश दिए गए।
जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि खदानों में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। पर्यावरणीय मानकों की भी खुली अवहेलना की जा रही थी। इसके अलावा वेस्ट मटेरियल को नदी किनारे फेंकने के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कलेक्टर ने सख्त निर्णय लेते हुए निसदा की सभी 7 खदानों के पट्टे निरस्त कर दिए। प्रशासन का कहना है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि खदानों में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। पर्यावरणीय मानकों की भी खुली अवहेलना की जा रही थी। इसके अलावा वेस्ट मटेरियल को नदी किनारे फेंकने के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कलेक्टर ने सख्त निर्णय लेते हुए निसदा की सभी 7 खदानों के पट्टे निरस्त कर दिए। प्रशासन का कहना है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि प्रशासन इसी तरह सख्ती दिखाता रहा तो आने वाले समय में क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन के कई और मामलों का भी खुलासा हो सकता है।
फिलहाल निसदा की 7 खदानों के पट्टे निरस्त होने के बाद खनन कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है और पूरे इलाके में इस कार्रवाई की चर्चा जोरों पर है।









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