*आरिंग (आरंग) के नरसिंग नाथ मंदिर जेकर आगू म होथे होलिका दहन*

आरिंग (आरंग) जेला मंदिर अउ शिवालय के नगरी के नाव ले जाने जाथे इंहा कतको देवी देवता मन बिराजमान हे । यहां भगवान नरसिंग नाथ के घलो मंदिर हे जउन ह चतुरभुजी रूप म बिराजमान हे जेकर बारे मे बहुत कम मनखे मन जानथे फेर जब ले भगवान बागेश्वर नाथ मंदिर  बने हे उहि समय के ये नरसिंग नाथ घलो हरे अइसन कहिथे । बहुत छोट कुन हे जेकर मंदिर के मुंह ह बूड़ती मुड़ा के हे। ओकरे आगू म आरिंग के बागेश्वर पारा 

के होलिका दहन ह होथे। बेद पुरान के कथा मन ल सारथक  करत ये मंदिर ह सतजुग के घटना ल उजागर करथे । कहे जाथे कि नरसिंग नाथ के होलिका दहन से जउन संबंध हे वो इंहा देखे बर मिलथे। जुन्ना एक किस्सा सुने बर मिलथे कि हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष दु भाई रिहिन जेमन राकच्छस कूल म जनम धरे रिहिस । जेमा हिरण्यकश्यप ह अमरता के बरदान पाय खातिर ब्रम्हा जी के तप करके वोला परसन कर डारिस त ब्रम्हा जी ह बरदान मांगे बर किहिस, त वो ह मोला अमर कर दे कहि दिस । ब्रम्हा कहे लागिस ये दुनिया म जउन भी जनम धर के आए हे तेला तो मरना ही परहि। येकर छोड़ कोनो दूसर बरदान मांग ले ।बड़ सोच बिचार के हिरण्यकश्यप ह किहिस की मोला अइसन बरदान देवव की मेहा न तो दिनमान मरव न रातकुन, न भीतरी म मरव न बाहिर म ,न धरती म मरव न बादर म,न कोनो जानवर ले मरव न तो मनखे से,न कोनो अस्त्र ले मरव न कोनो शस्त्र से अइसन बरदान देवव कहिके।ब्रम्हा जी राजी होगे अउ बरदान दे दिस । अब बरदान ल पाके वोकर अति के ठिकाना नइ रहिगे। देवता मन ल तो कूदा- कूदा के मारे अउ कोनो साधुसंत मन ल पूजा पाठ करन नइ देवय। वोकर अतियाचार ले तीनों लोक म हाहाकार मच गे राहय। अउ अपन आप ल भगवान कहावय । वोकरे घर म प्रहलाद नाव के वोकर बेटा होइस । जउन ह एक दिन पांड़े मन के गली ले जावत रिहिस हे त पांड़े अउ पड़ियइन दुनों झन *हरि नाम साँचा बिलई पिला बाँचा* के जप करत रहे । जब प्रहलाद ह पूछिस की तुमन ह मोर पिता ल भगवान नइ मान के ये का हरि के जप करत हव का मोर पिता ह भगवान नोहे । पांड़े कहे राजकुमार तोर पिता ह भलुक अपन आप ल भगवान कहि ले फेर असल म तो हरि ले बढ़ के कोनो नोहे ।अउ मैं आजे ये भट्ठी म आगी ढिले हव तेकर भीतरी म बिलई के पिला मन खुसर गे रिहिस मोला जानबा नइ होय पाय रिहिस। ये आगी ल जुड़ाय बर एक पन्दरहि लग जहि अउ हरि नाम दुनिया म सच्चा होही तो ये बिलई पिला मन ल कहींच नइ होय। प्रहलाद रोज आवय त पांड़े मन हरि नाम साँचा बिलई पिला बाँचा के जाप करत रहय अउ सही म पन्दरहि म जब भठ्ठी ल खोलिस तो बिलई पिला मन ल एक कनी कुछच नइ होय राहय । तभे ले प्रहलाद ह घलो हरि नाम के जप करे बर धर लिस । ये बात ह जब हिरण्यकश्यप ल पता चलिस त अपने लईका ल मोला भगवान  नइ मानत हस कहिके कतको किसम के मारे के उदिम कर डारिस । पहाड़ी ले फेंकवा दिस, गहिरी नदिया म फेंकवा दिस फेर हरि के किरपा ले प्रहलाद ल खरोच घलो नइ आए। घुसिया के अपन बहिनी होलिका ल प्रहलाद ल आगी म जला दे कहिके घलो कहि दिस। होलिका ल घलो बरदान मिले रहे कि बरदान के लुगरा ल पहिन के जब आगी म बइठही त वोला कुछुच नइ होवय। उहि पाय के ओहा प्रहलाद ल अपन गोदी म बइठार के आगी म बइठ गे फेर हरि के जाप के सेती वो खुदे जर गे फेर प्रहलाद ल कुछु नइ होइस। अब तो हिरण्यकश्यप अउ घुस्सा होगे अउ जोर से अपन राज दरबार म संझौति के बेरा म अपने ह अपन बेटा ल मारे बर धर लिस । जोर जोर से चिल्लाय बला तोर हरि ल कहाँ हे आज वोला मय नइ छोड़व । प्रहलाद ह अपन पिता ल कहे वो तो दुनिया के कन कन म समाय हे ये दुनिया ओकरे ले तो चलत हे। अतका ल सुन के अउ आगी होगे अउ किहिस का ये खंभा म घलो हे तोर हरि ह प्रहलाद हव कहि दिस । पूरा ताकत लगा के हिरण्यकश्यप ह एक गदा खंभा ल मारिस ते खम्भा के भीतरी ले भारी बिकराल रूप धरे हरि विष्णु जी परगट होगे अउ हिरण्यकश्यप ल धरके मोहाटी के चौखट करा लेग गे अउ अकासबानी होय लागिस हिरण्यकश्यप आज तोर संहार खच्चीत हे तै बरदान मांगे रहे न,

न तो दिनमान मरव न रातकुन त देख अभी न दिन हे न रात अभी संझौति के बेरा हे, न भीतरी म मरव न बाहिर म त देख अभी न तो तै भीतरी म हस न बाहिर म अभी डेराउठि म हस ,न धरती म मरव न बादर म त देख तै गोदी म हस न तो तै धरती म हस नतो तै बादर म,न कोनो जानवर ले मरव न तो मनखे से त देख ये न तो कोनो पूरा जानवर हरे न कोनो मनखे ,न कोनो अस्त्र ले मरव न कोनो शस्त्र से त देख तोला मारे बर कोनो अस्त्र शस्त्र नइ  हे फेर अपन नख ले तोर संहार करत हे ये नरसिंग हरे । अउ नरसिंग नाथ हर वोकर संहार करिस। अउ भगवान के घुस्सा ह प्रहलाद ल गोदी म बइठारे के बाद सांत होइस । 


उहि बखत ले फागुन म होलिका दहन अउ रंग गुलाल खेले के परंपरा ह चलत हे कहिथे।जउन अधरम म धरम के जीत के परब के रूप म मनाय जाथे।

ये परंपरा ह कतको बछर ले आरिंग म घलो चलत हे लोगन मन नंगाडा  के धून म अपन लोक गीत के माध्यम ले ये कथा कहिनी ल गाथे,,,,

हरि नाम प्रहलाद नाम गावत हे रे

अपन संगी जहुरिया ल बतावत हे न

हरि नाम साँचा बिलई पिला बाँचा,,2

हरि हरि घेरी बेरी गावत हे न

हरि हरि घेरी बेरी गावत हे रे

हरि नाम प्रहलाद नाम गावत हे रे,,


*रचना* 

*चेतन सिंह चौहान*

*लिंगाडीह आरंग*

*930352789*