शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले में व्यापार की शुरुआत : दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) स्कूल की मनमानी 10 वी के छात्रों पर दबाव

रायपुर – शिक्षा के मंदिर अब व्यापारिक केंद्र बनते जा रहे हैं, और इसका ताजा उदाहरण राजधानी रायपुर का प्रतिष्ठित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) पेश कर रहा है। जहां एक ओर 10वीं बोर्ड के छात्र परीक्षा के बाद परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, वहीं डीपीएस प्रबंधन ने एक ऐसा ‘अल्टीमेटम’ जारी किया है जिससे अभिभावकों की रातों की नींद उड़ गई है।

 11 मार्च तक विषय, 19 मार्च तक फीस!

स्कूल प्रबंधन ने छात्रों और अभिभावकों पर दबाव बनाया है कि वे 11 मार्च तक कक्षा 11वीं के लिए विषयों (स्ट्रिंम )का चयन कर लें। इतना ही नहीं, 19 मार्च तक फीस जमा करने का फरमान भी सुना दिया गया है। सवाल यह उठता है कि जब सीबीएसई (CBSE) का रिजल्ट 30 अप्रैल के आसपास आने की उम्मीद है, तो स्कूल प्रबंधन को इतनी जल्दी किस बात की है?

*क्या स्कूल छोड़ने के डर से बौखलाया प्रबंधन?*

कुछ छात्र आगे के भविष्य की तैयारी करने के लिए स्कूल छोड़कर घर से ही पढ़ाई करते हैं, जिससे स्कूल प्रबंधन में भय है कि कहीं छात्र स्कूल छोड़ न दें। इसी ‘आर्थिक नुकसान’ से बचने के लिए छात्रों को समय से पहले बांधने की साजिश रची जा रही है।

*नियम ताक पर, मनमानी चरम पर*

रायपुर के अन्य प्रमुख स्कूलों से बात करने पर पता चला कि वे रिजल्ट आने के बाद ही विषय चयन की प्रक्रिया शुरू करते हैं। आमतौर पर सत्र की फीस 1 अप्रैल से ली जाती है, लेकिन डीपीएस ने मार्च के मध्य में ही वसूली का जाल बिछा दिया है।

*अभिभावकों के बड़े सवाल:*

- योग्यता का आधार क्या?: बिना 10वीं का रिजल्ट देखे स्कूल यह कैसे तय कर सकता है कि कौन सा छात्र किस विषय के योग्य है?

- अग्रिम वसूली क्यों?: नया सत्र अप्रैल से शुरू होता है, तो मार्च में ही फीस का दबाव क्यों बनाया जा रहा है?

- मानसिक प्रताड़ना: क्या शिक्षा का मतलब केवल पैसा कमाना रह गया है? छात्रों को परिणाम से पहले इस तरह मानसिक रूप से परेशान करना कितना जायज है?

*शिक्षा विभाग की चुप्पी पर सवाल*

क्या रायपुर का जिला शिक्षा विभाग (DEO) इस तानाशाही को चुपचाप देखता रहेगा? एक निजी संस्थान अपनी मर्जी से नियम कैसे बना सकता है जो छात्रों के भविष्य और अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ें?