छत्तीसगढ़ के चर्चित हजारों करोड़ के शराब घोटाले में गुरुवार को अहम कार्रवाई हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत में इस मामले से जुड़े 59 आरोपियों को पेश किया गया, जहां सभी के बयान दर्ज किए गए। यह कार्रवाई जांच की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस मामले में कुल 82 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 23 को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। शेष आरोपियों को अदालत में पेश कर उनकी भूमिका से जुड़े दस्तावेज और बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
कोर्ट में पेश हुए आरोपियों में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल और निरंजन दास समेत कई अधिकारी और कारोबारी शामिल रहे। हाई-प्रोफाइल मामले को देखते हुए कोर्ट परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, पहले कम संख्या में आरोपियों की पेशी की जानकारी थी, लेकिन बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 59 तक पहुंच गया। सभी आरोपियों को क्रमवार अदालत में बुलाकर उनके बयान दर्ज किए गए और दस्तावेजों की जांच की गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक यह घोटाला अवैध शराब कारोबार, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व में हेरफेर से जुड़ा हुआ है। ED इस पूरे मामले की लंबे समय से जांच कर रही है और जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
इस मामले में ED ने एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें 3200 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है। जांच में पूर्व मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।
ED का दावा है कि तत्कालीन व्यवस्था के दौरान एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से इस घोटाले को अंजाम दिया गया। इसमें कुछ अधिकारियों और व्यापारियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
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