धरमजयगढ़ डाकघर में अव्यवस्था का अंधेरा, बिजली गुल होते ही ठप पड़ती सेवाएं, उपभोक्ताओं में गहरी नाराजगी !
धरमजयगढ़। नगर के मुख्य डाकघर में इन दिनों अव्यवस्थाओं का ऐसा आलम है कि आम नागरिकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। आज़ादी के बाद स्थापित यह डाकघर आधुनिक तकनीकी युग में भी अपेक्षित सुविधाओं से वंचित नजर आ रहा है। स्थिति यह है कि जैसे ही बिजली गुल होती है, डाकघर का समूचा कार्य ठप पड़ जाता है और दूर-दराज़ से आए ग्रामीणों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह डाकघर एचएसजी-2 श्रेणी का कार्यालय है, जहां वर्तमान में केवल एक सहायक डाकपाल और दो डाक सहायक ही कार्यरत हैं। वहीं एचएसजी-2 पोस्टमास्टर का पद लंबे समय से रिक्त पड़ा हुआ है, जिससे व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावित हो रही हैं। स्टाफ की कमी और तकनीकी बाधाओं के चलते रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट सहित कई आवश्यक सेवाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। मामले में स्थानीय नागरिक संतोष कुमार ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि वे पिछले दो दिनों से रजिस्ट्री और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए डाकघर के चक्कर लगा रहे हैं, किंतु हर बार संबंधित काउंटर पर ‘बंद’ का बोर्ड लगा मिलता है। उनका कहना है कि लोग अपने काम-धंधे छोड़कर यहां आते हैं, लेकिन निराशा ही हाथ लगती है। सर्वर डाउन होने की समस्या भी आम हो गई है, जिससे कार्य अधूरे रह जाते हैं और बार-बार आना पड़ता है। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो डाकघर को स्थायी रूप से बंद कर देना ही बेहतर होगा। और वहीं इस अव्यवस्था का सबसे अधिक दुष्प्रभाव बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें हर बार लंबी दूरी तय कर वापस लौटना पड़ता है।
बता दें,इस संबंध में कार्यवाहक डाकपाल रवि सोनी ने बताया कि डाकघर की सभी समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि बिजली जाते ही समस्त कार्य बाधित हो जाते हैं। इसके समाधान हेतु यूपीएस (बैकअप) की मांग की गई है, जिसे शीघ्र उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। साथ ही तकनीकी खामियों को दूर करने के प्रयास भी जारी हैं।
वहीं नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि डाकघर की व्यवस्थाओं में शीघ्र सुधार किया जाए, ताकि आम जनता को सुचारू एवं निर्बाध सेवाएं प्राप्त हो सकें। वर्तमान हालातों में यह डाकघर सुविधा का केंद्र कम, परेशानी का कारण अधिक बनता जा रहा है।












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