शिक्षा का व्यवसायीकरण: आम जनता पर बढ़ता बोझ

📍 विशेष रिपोर्ट | सृजन भूमि छत्तीसगढ़ न्यूज

देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा, जिसे समाज की नींव माना जाता है, अब धीरे-धीरे एक व्यवसाय का रूप लेती जा रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की स्थिति कमजोर होती जा रही है, वहीं प्राइवेट स्कूलों का तेजी से विस्तार देखने को मिल रहा है।

🏫 सरकारी स्कूलों की गिरती स्थिति

गांवों और शहरों में सरकारी स्कूलों की हालत लगातार बिगड़ रही है। कई जगह बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जिससे अभिभावक मजबूर होकर महंगे प्राइवेट स्कूलों का रुख कर रहे हैं। वहीं प्राइवेट स्कूलों पर अधिक फीस और अन्य खर्चों को लेकर लूट के आरोप भी लग रहे हैं।

👨‍🏫 शिक्षकों पर आरोप और दबाव

शिक्षा के गिरते स्तर का दोष अक्सर शिक्षकों पर डाला जाता है, जबकि असल समस्या व्यवस्था और संसाधनों की कमी से जुड़ी हुई है। इससे शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बनता जा रहा है।

🎓 उच्च शिक्षा में बढ़ता संकट

इंजीनियरिंग, बीएड, नर्सिंग और मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन गुणवत्ता और रोजगार के अवसरों में गिरावट आई है। बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेने के बाद भी बेरोजगार हैं, जिससे समाज में निराशा का माहौल बन रहा है।

💰 महंगी पढ़ाई, गरीबों की मुश्किलें

मेडिकल शिक्षा जैसे MBBS और MD कोर्स की फीस लाखों से करोड़ों तक पहुंच गई है। ऐसे में गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना बेहद कठिन हो गया है। शिक्षा में सेवा भावना की जगह अब पैसे का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

⚖️ असमानता और व्यवस्था पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में असमानता बढ़ रही है। एक वर्ग को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि दूसरे वर्ग के लिए शिक्षा दूर होती जा रही है। जेंडर और आर्थिक असमानता भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है।


🌟 निष्कर्ष:
शिक्षा का व्यवसायीकरण देश के भविष्य के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। जरूरत है कि सरकार शिक्षा पर खर्च बढ़ाए और सभी वर्गों के लिए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करे। 

शिक्षा

शिक्षा देश की पढ़ण बिठाई अपणा व्यापार चलाया रै।।

गावों शहर के सरकारी स्कूलां का धुम्मा सा ठाया रै।।

1

सरकारी स्कूल के तम्बू पाड़े प्राइवेट स्कूल ल्याए रै 

प्राइवेट घनी लूट मचारे शिक्षक जावैं घणे सताए रै

शिक्षा स्तर उड़ै भी माड़ा सै माँ बाप तो  दुःख पाये रै 

सरकार नै शिक्षा पै खर्च घटा जनता कै सांस चढ़ाये रै

खराबी के सैं टीचर दोषी कसूता प्रचार कराया रै ।।

शिक्षा देश की पढ़ण बिठाई अपणा व्यापार चलाया रै।।

2

इंजीन्यरिंग कालेज खुलरे सैं बी टेक बिकती गिनाऊँ देखो 

कुछ दिन बीएड कालेज खुल्ले इब बन्द होंते दिखाऊँदेखो 

नर्सिंग कालेज आये घणे उनकी हुई दुर्गति बताऊँ देखो 

मेडिकल कालेजों का काल नै योहे हाल मैं सुनाऊँ देखो 

बेरोजगारी के बादल छारे घुटन का माहौल बनाया रै।।

शिक्षा देश की पढण बिठाई अपणा व्यापार चलाया रै।।

3

साठ लाख मैं एम बी बी एस दो करोड़ की एम डी होगी 

इलाज मैं सेवा कित बचै पिस्से की चकाचौंध इनै ख़ोगी 

गरीब की शिक्षा गई भाड़ मैं सरकार तानकै लाम्बी सोगी 

बाजार व्यवस्था हावी हुई या आज  बीज बिघण के बोगी 

शासक वर्ग नै अपनी खातर न्यारा ढांचा सै बनाया रै।।

शिक्षा देश की पढ़ण बिठाई  अपणा व्यापार चलाया रै।।

4

एयर कण्डीशण्ड दुनिया का भारत न्यारा बना राख्या रै

दूजे कांही नब्बे प्रतिशत कै सांस कसूता चढ़ा राख्या रै

एक की शिक्षा घणी जरूरी दूज्यां का ढोल बजा राख्या रै

जेण्डर बायस  शिक्षा मैं यो कसूते ढाल छिपा राख्या रै 

रणबीर सिंह शिक्षा पै गेरी दुभांत की कसूती छाया रै ।।

शिक्षा देश की पढ़ण बिठाई अपणा व्यापार चलाया रै।।