जग्गी हत्याकांड में बड़ा मोड़: सरेंडर आदेश पर अमित जोगी बोले- मेरे साथ हुआ अन्याय, SC से मिलेगी राहत
छत्तीसगढ़ के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में गुरुवार, 2 अप्रैल को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिविजन बेंच ने सुनवाई के दौरान JCCJ अध्यक्ष अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
अमित जोगी ने बताया फैसला ‘अन्यायपूर्ण’
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि सीबीआई की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया गया, जबकि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
उन्होंने इसे अपने साथ गंभीर अन्याय बताया और कहा कि जिस व्यक्ति को पहले अदालत से राहत मिली थी, उसे बिना सुनवाई का मौका दिए दोषी ठहराया जाना चौंकाने वाला है। जोगी ने यह भी कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे सुप्रीम कोर्ट में न्याय की उम्मीद के साथ आगे बढ़ेंगे।
पीड़ित परिवार ने जताई संतुष्टि
दूसरी ओर, स्वर्गीय रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट के फैसले को न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि करीब 20 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उनके परिवार को राहत मिली है।
उन्होंने इसे अपने परिवार की तपस्या का फल बताया और न्यायालय व जांच एजेंसी के प्रति आभार जताया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पिता को खोने का दुख कभी खत्म नहीं हो सकता।
11 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट बनी आधार
इस मामले में सीबीआई ने करीब 11,000 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी, जिसमें अमित जोगी के खिलाफ भी आरोप शामिल किए गए थे। पहले उन्हें इस केस में बरी कर दिया गया था, लेकिन बाद में मामले को फिर से खोला गया।
तीन हफ्ते में करना होगा सरेंडर
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। इस आदेश के बाद उनके लिए कानूनी चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं।
2003 में हुई थी जग्गी की हत्या
गौरतलब है कि साल 2003 में राकांपा नेता रामअवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, उस समय अमित जोगी को कोर्ट ने बरी कर दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले को दोबारा खोला गया और अब हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फिर शुरू हुई सुनवाई
कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए इस केस को दोबारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा था। इसी के तहत हाल ही में डिविजन बेंच ने सुनवाई कर यह अहम आदेश जारी किया है।
छत्तीसगढ़ के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में गुरुवार, 2 अप्रैल को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिविजन बेंच ने सुनवाई के दौरान JCCJ अध्यक्ष अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
अमित जोगी ने बताया फैसला ‘अन्यायपूर्ण’
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि सीबीआई की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया गया, जबकि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
उन्होंने इसे अपने साथ गंभीर अन्याय बताया और कहा कि जिस व्यक्ति को पहले अदालत से राहत मिली थी, उसे बिना सुनवाई का मौका दिए दोषी ठहराया जाना चौंकाने वाला है। जोगी ने यह भी कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे सुप्रीम कोर्ट में न्याय की उम्मीद के साथ आगे बढ़ेंगे।
पीड़ित परिवार ने जताई संतुष्टि
दूसरी ओर, स्वर्गीय रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट के फैसले को न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि करीब 20 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उनके परिवार को राहत मिली है।
उन्होंने इसे अपने परिवार की तपस्या का फल बताया और न्यायालय व जांच एजेंसी के प्रति आभार जताया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पिता को खोने का दुख कभी खत्म नहीं हो सकता।
11 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट बनी आधार
इस मामले में सीबीआई ने करीब 11,000 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी, जिसमें अमित जोगी के खिलाफ भी आरोप शामिल किए गए थे। पहले उन्हें इस केस में बरी कर दिया गया था, लेकिन बाद में मामले को फिर से खोला गया।
तीन हफ्ते में करना होगा सरेंडर
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। इस आदेश के बाद उनके लिए कानूनी चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं।
2003 में हुई थी जग्गी की हत्या
गौरतलब है कि साल 2003 में राकांपा नेता रामअवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, उस समय अमित जोगी को कोर्ट ने बरी कर दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले को दोबारा खोला गया और अब हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फिर शुरू हुई सुनवाई
कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए इस केस को दोबारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा था। इसी के तहत हाल ही में डिविजन बेंच ने सुनवाई कर यह अहम आदेश जारी किया है।










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